उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति 2026 नवाचार-संचालित उद्यमिता इकोसिस्टम को सुदृढ़ बनाने के लिए एक महत्वाकांक्षी रूपरेखा प्रस्तुत करती है। यह अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों को प्रोत्साहित करने, जिला स्तर पर इनक्यूबेशन का विस्तार करने तथा राज्यभर में प्रभावी वित्तीय प्रोत्साहन उपलब्ध कराने पर केंद्रित है।
डाउनलोड पॉलिसी के लिए QR स्कैन करेंपात्रता एवं दिशानिर्देशों से संबंधित विस्तृत जानकारी हेतु आधिकारिक PDF अधिसूचनाएँ डाउनलोड करें।
प्रोटोटाइप चरण तक अधिकतम 2 वर्षों के लिए त्रैमासिक आधार पर प्रदान किया जाएगा।
भौतिक अथवा सॉफ्टवेयर अनुप्रयोग प्रोटोटाइप हेतु दो किस्तों (70% अग्रिम, 30% प्रतिपूर्ति) में प्रदान किया जाएगा।
कच्चे माल, हार्डवेयर/सॉफ्टवेयर उपकरण, परीक्षण एवं विपणन हेतु। (विशेष मामलों में ₹50 लाख तक)।
मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय फंड से न्यूनतम ₹2 करोड़ का निवेश प्राप्त करने वाले स्टार्टअप को 50% समतुल्य अनुदान।
महिला, दिव्यांगजन, ट्रांसजेंडर, EWS अथवा पूर्वांचल/बुंदेलखंड के स्टार्टअप के लिए सीड एवं प्रोटोटाइप अनुदान पर 50% अतिरिक्त बोनस।
पेटेंट एवं प्रमाणन हेतु ₹50 लाख तक के व्यय पर 100% प्रतिपूर्ति; ₹50 लाख–₹1 करोड़ श्रेणी के लिए 75% तथा ₹1 करोड़–₹2 करोड़ श्रेणी के लिए 50% प्रतिपूर्ति।
CoE अथवा यू-हब द्वारा अनुशंसित डीप टेक स्टार्टअप को मानक प्रोटोटाइप एवं सीड अनुदान का दो गुना तक लाभ प्रदान किया जाएगा।
राजस्व साझेदारी, बौद्धिक संपदा (IP) के व्यावसायीकरण अथवा दीर्घावधि CCPS इक्विटी के माध्यम से जोखिम-सहनशील सहायता।
सत्यापित अनुसंधान एवं विकास लागत पर गैर-इक्विटी समतुल्य अनुदान। ₹1 करोड़ से अधिक राजस्व प्राप्त होने के पश्चात ही 3% राजस्व रॉयल्टी के आधार पर देय।
प्रति वित्तीय वर्ष ₹50,000 से अधिक के क्लाउड एवं डेटा सेंटर व्यय पर 50% प्रतिपूर्ति।
₹1.25 करोड़ तक 50% पूंजीगत अनुदान प्रतिपूर्ति (पूर्वांचल एवं बुंदेलखंड क्षेत्रों में ₹1.50 करोड़ तक)।
इनक्यूबेटर के प्रदर्शन मूल्यांकन (KPIs) के आधार पर 5 वर्षों तक अथवा आत्मनिर्भर होने तक वार्षिक परिचालन अनुदान।
क्वांटम, एआई एवं स्पेस टेक जैसे उभरते क्षेत्रों में 20 विश्वस्तरीय CoE स्थापित करने हेतु 5 वर्षों तक वित्तीय अनुदान।