स्टार्टअप वह इकाई है जिसे भारत सरकार की स्टार्टअप परिभाषा के अंतर्गत मान्यता प्राप्त हो तथा जो प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, लिमिटेड लाइबिलिटी पार्टनरशिप (LLP), पार्टनर फर्म, सहकारी समिति अथवा बहु-राज्य सहकारी समिति के रूप में स्थापित हो। ऐसी इकाई उत्पादों, प्रक्रियाओं अथवा सेवाओं में नवाचार, विकास या सुधार से संबंधित हो अथवा उसका व्यवसाय मॉडल विस्तार योग्य हो तथा उसमें रोजगार सृजन या संपदा सृजन की उच्च क्षमता हो। सामान्यतः ऐसी इकाई की स्थापना को 10 वर्ष से अधिक न हुए हों तथा उसका वार्षिक कारोबार ₹200 करोड़ से अधिक न हो। डीप-टेक स्टार्टअप के लिए विशेष प्रावधान लागू हैं।
नीति के अंतर्गत लाभ प्राप्त करने के लिए स्टार्टअप का डीपीआईआईटी (DPIIT) प्लेटफ़ॉर्म तथा StartInUP पोर्टल दोनों पर पंजीकरण होना आवश्यक है। पात्र स्टार्टअप पोर्टल के माध्यम से प्रोत्साहनों एवं सहायता योजनाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदनों का मूल्यांकन स्टार्टअप रिव्यू कमेटी ऑफ एक्सपर्ट्स (SRCE) द्वारा किया जाता है तथा वित्तीय प्रोत्साहन स्वीकृत किए जाने से पूर्व उन्हें पॉलिसी इम्प्लीमेंटेशन यूनिट (PIU) द्वारा अनुमोदित किया जाता है।
हाँ। मौजूदा इकाइयाँ भारत सरकार की स्टार्टअप परिभाषा तथा उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति 2026 के अंतर्गत निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करने पर StartInUP पोर्टल पर पंजीकरण कर सकती हैं। तथापि, किसी विद्यमान व्यवसाय के विभाजन अथवा पुनर्गठन के परिणामस्वरूप गठित इकाई को स्टार्टअप नहीं माना जाएगा।
आवेदकों को StartInUP पोर्टल के माध्यम से सभी आवश्यक सहायक दस्तावेज़ों एवं घोषणाओं सहित पूर्ण आवेदन प्रस्तुत करना होगा। आवश्यक दस्तावेज़ों का विस्तृत विवरण परिचालन दिशानिर्देशों तथा पोर्टल की आवेदन प्रक्रिया में उपलब्ध कराया जाएगा।
मान्यता प्राप्त होने के पश्चात स्टार्टअप अपने विकास चरण के अनुसार नीति के अंतर्गत उपलब्ध वित्तीय एवं गैर-वित्तीय प्रोत्साहनों के लिए आवेदन करने के पात्र हो जाते हैं। साथ ही, वे इनक्यूबेशन सहायता, मार्गदर्शन (मेंटरशिप), वित्तीय सहायता के अवसर, नेटवर्किंग सहायता, स्टार्टअप कार्यक्रमों, निवेशक संपर्क कार्यक्रमों तथा बाज़ार संपर्क सुविधाओं का भी लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
StartInUP उत्तर प्रदेश सरकार की प्रमुख स्टार्टअप पहल है, जिसका उद्देश्य राज्य में एक सशक्त एवं गतिशील स्टार्टअप इकोसिस्टम का विकास करना है। StartInUP पोर्टल के माध्यम से स्टार्टअप, इनक्यूबेटर, निवेशक, मार्गदर्शक (मेंटर), सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस (CoE) तथा अन्य हितधारक प्रोत्साहनों, सहायता सेवाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, नेटवर्किंग के अवसरों एवं इकोसिस्टम से संबंधित संसाधनों का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
StartInUP पोर्टल एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के रूप में कार्य करता है, जहाँ स्टार्टअप पंजीकरण, ऑनलाइन वित्तीय प्रोत्साहन आवेदन, मार्गदर्शन (मेंटरशिप), निवेशकों तक पहुँच, नेटवर्किंग के अवसर, स्टार्टअप इकोसिस्टम से संबंधित संसाधन, प्रशिक्षण कार्यक्रम, शिकायत निवारण सेवाएँ तथा स्टार्टअप से संबंधित योजनाओं एवं कार्यक्रमों की जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाती है।
पंजीकरण के माध्यम से स्टार्टअप उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति 2026 के अंतर्गत उपलब्ध सरकारी प्रोत्साहनों, इनक्यूबेशन सहायता, मार्गदर्शन (मेंटरशिप), निवेशक संपर्क के अवसरों, स्टार्टअप नेटवर्किंग, नवाचार कार्यक्रमों, स्टार्टअप आयोजनों, ज्ञान संसाधनों तथा विभिन्न वित्तीय एवं गैर-वित्तीय लाभों का उपयोग कर सकते हैं।
पात्र स्टार्टअप निर्धारित आवेदन प्रपत्र एवं आवश्यक सहायक दस्तावेज़ों के साथ StartInUP पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। आवेदन का परीक्षण नोडल एजेंसी द्वारा किया जाता है तथा सफल सत्यापन के उपरांत स्टार्टअप को नीति के अंतर्गत मान्यता प्रदान की जाती है।
हाँ। उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति 2026 के अंतर्गत वित्तीय प्रोत्साहन प्राप्त करने के लिए स्टार्टअप का डीपीआईआईटी (DPIIT) तथा StartInUP पोर्टल दोनों पर पंजीकरण होना अनिवार्य है।
StartInUP कार्यक्रम के अंतर्गत स्टार्टअप मान्यता प्राप्त करने के लिए नीति में किसी भी प्रकार के पंजीकरण शुल्क का प्रावधान नहीं है।
नीति के अंतर्गत स्टार्टअप के लिए निम्नलिखित प्रमुख वित्तीय प्रोत्साहनों का प्रावधान है:
निर्वाह भत्ता
प्रोटोटाइप अनुदान
सीड कैपिटल सहायता
प्राप्त वित्तीय सहायता पर समतुल्य अनुदान
पेटेंट एवं गुणवत्ता प्रमाणन प्रतिपूर्ति
सावधि ऋण पर ब्याज अनुदान
पीएफ/ईएसआई प्रतिपूर्ति
नेटवर्किंग सहायता / आयोजन अनुदान
एक्सेलेरेटर कार्यक्रम सहायता
डीप-टेक स्टार्टअप वित्तीय प्रोत्साहन
कंप्यूटिंग क्षमता प्रतिपूर्ति
प्रोटोटाइप चरण तक के पात्र स्टार्टअप को दो वर्षों की अवधि के लिए ₹20,000 प्रति माह की दर से निर्वाह भत्ता प्रदान किया जा सकता है। इस राशि का भुगतान त्रैमासिक आधार पर किया जाता है।
StartInUP पोर्टल पर पंजीकृत पात्र स्टार्टअप को प्रोटोटाइप विकास हेतु एकमुश्त ₹10 लाख तक का प्रोटोटाइप अनुदान प्रदान किया जा सकता है। यह अनुदान दो किश्तों में जारी किया जाता है, जिसमें 70% राशि अग्रिम रूप से तथा शेष 30% राशि निर्धारित शर्तों की पूर्ति के उपरांत प्रतिपूर्ति के आधार पर प्रदान की जाती है।
पात्र स्टार्टअप को प्रोटोटाइप परिष्करण, उत्पाद एवं प्रक्रिया विकास, बाज़ार अनुसंधान, परीक्षण, ट्रायल, विपणन, सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर तथा अन्य संबंधित व्ययों के लिए ₹15 लाख तक की सीड कैपिटल सहायता प्रदान की जा सकती है। विशेष परिस्थितियों में ₹15 लाख से अधिक तथा ₹50 लाख तक की सहायता के लिए प्रस्तुत प्रस्तावों पर भी विचार किया जा सकता है।
जिन स्टार्टअप ने मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय अथवा अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से निवेश प्राप्त किया है, वे जुटाई गई निधि की 50% राशि के समतुल्य अनुदान के पात्र हो सकते हैं। इसके लिए न्यूनतम ₹2 करोड़ का निवेश प्राप्त होना आवश्यक है तथा अनुदान की अधिकतम सीमा ₹5 करोड़ है।
हाँ। जिन स्टार्टअप में महिला संस्थापकों अथवा सह-संस्थापकों की न्यूनतम 51% हिस्सेदारी है, वे स्वीकृत प्रोटोटाइप अनुदान एवं सीड कैपिटल सहायता पर अतिरिक्त 50% वित्तीय प्रोत्साहन प्राप्त करने के पात्र हैं।
हाँ। जिन स्टार्टअप में दिव्यांगजन, ट्रांसजेंडर अथवा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के संस्थापकों अथवा सह-संस्थापकों की न्यूनतम 51% हिस्सेदारी है, वे स्वीकृत प्रोटोटाइप अनुदान एवं सीड कैपिटल सहायता पर अतिरिक्त 50% वित्तीय प्रोत्साहन प्राप्त करने के पात्र हैं।
हाँ। जिन स्टार्टअप का पंजीकृत कार्यालय पूर्वांचल अथवा बुंदेलखंड में स्थित है, वे प्रोटोटाइप अनुदान एवं सीड कैपिटल सहायता पर अतिरिक्त 50% वित्तीय प्रोत्साहन प्राप्त करने के पात्र हैं।
हाँ। एग्री-टेक, परिपत्र अर्थव्यवस्था (Circular Economy), ग्रामीण प्रभाव (Rural Impact), अपशिष्ट प्रबंधन, सतत विकास, नवीकरणीय ऊर्जा तथा जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में कार्यरत स्टार्टअप स्वीकृत प्रोटोटाइप अनुदान एवं सीड कैपिटल सहायता पर अतिरिक्त 50% वित्तीय प्रोत्साहन प्राप्त करने के पात्र हैं।
सरकार, पूर्व स्वीकृति के अधीन, स्टार्टअप कार्यक्रमों, सम्मेलनों एवं प्रदर्शनियों में सहभागिता पर हुए व्यय का 50% प्रतिपूर्ति के रूप में प्रदान करती है। राष्ट्रीय आयोजनों के लिए अधिकतम ₹50,000 तथा अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के लिए अधिकतम ₹2 लाख तक की प्रतिपूर्ति उपलब्ध है।
पात्र स्टार्टअप को एक्सेलेरेशन कार्यक्रमों में सहभागिता के लिए कार्यक्रम शुल्क की प्रतिपूर्ति प्रदान की जा सकती है। एक्सेलेरेटर की श्रेणी के अनुसार प्रति कार्यक्रम अधिकतम ₹3 लाख तक की प्रतिपूर्ति उपलब्ध है तथा नीति अवधि के दौरान अधिकतम दो कार्यक्रमों के लिए यह सहायता प्रदान की जा सकती है।
स्टार्टअप पेटेंट दाखिल करने तथा मान्यता प्राप्त संस्थाओं से गुणवत्ता प्रमाणन प्राप्त करने में हुए व्यय की प्रतिपूर्ति के पात्र हैं। नीति के अंतर्गत स्वीकृत स्लैब संरचना के अनुसार अधिकतम ₹2 करोड़ तक की प्रतिपूर्ति प्रदान की जा सकती है।
हाँ। पात्र स्टार्टअप को अनुसूचित बैंकों अथवा वित्तीय संस्थानों से प्राप्त सावधि ऋण पर, निर्धारित शर्तों एवं सीमाओं के अधीन, प्रति वर्ष 4% ब्याज अनुदान अथवा वास्तविक भुगतान किए गए ब्याज की राशि, जो भी कम हो, प्रदान की जा सकती है।
हाँ। निर्धारित शर्तों के अधीन, राज्य सरकार पात्र स्टार्टअप के लिए तीन वर्षों की अवधि तक नियोक्ता द्वारा भविष्य निधि (PF) एवं कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) में किए गए अंशदान की प्रतिपूर्ति प्रदान करती है।
सामान्यतः प्रोत्साहनों के लिए आवेदन करते समय स्टार्टअप का StartInUP द्वारा मान्यता प्राप्त किसी इनक्यूबेटर में इनक्यूबेट होना तथा संबंधित इनक्यूबेटर की अनुशंसा प्राप्त करना आवश्यक है। हालांकि, विस्तार (Scaling) चरण अथवा उससे आगे के चरण में पहुँच चुके स्टार्टअप के लिए यह शर्त लागू नहीं होगी।
डीप-टेक स्टार्टअप को संवर्धित प्रोटोटाइप एवं सीड अनुदान, पेशेंस कैपिटल सहायता, रॉयल्टी-आधारित अनुसंधान एवं विकास (R&D) समतुल्य अनुदान तथा कंप्यूटिंग क्षमता, क्लाउड सेवाओं एवं डेटा सेंटर व्यय की प्रतिपूर्ति जैसी सहायता उपलब्ध है।
पेशेंस कैपिटल डीप-टेक स्टार्टअप के लिए एक दीर्घकालिक वित्तीय सहायता व्यवस्था है, जो लंबी विकास अवधि वाली उच्च प्रभावकारी नवाचार परियोजनाओं के लिए विकसित की गई है। पात्र स्टार्टअप को निर्धारित पात्रता एवं अनुमोदन के अधीन प्रति स्टार्टअप अधिकतम ₹40 करोड़ तक की सहायता प्रदान की जा सकती है।
पात्र स्टार्टअप को क्लाउड सेवाओं एवं डेटा सेंटर अवसंरचना पर किए गए व्यय की प्रतिपूर्ति प्रदान की जा सकती है। निर्धारित शर्तों के अधीन प्रति वित्तीय वर्ष अधिकतम ₹2 लाख तक की प्रतिपूर्ति उपलब्ध है।
हाँ। डीपीआईआईटी (DPIIT) से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप को गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पर उपलब्ध विभिन्न सुविधाओं का लाभ प्राप्त होता है, जिनमें पूर्व अनुभव, न्यूनतम कारोबार तथा अर्नेस्ट मनी डिपॉज़िट (EMD) संबंधी आवश्यकताओं से छूट शामिल है। साथ ही, राज्य सरकार का उद्देश्य पब्लिक प्रोक्योरमेंट में स्टार्टअप की भागीदारी को बढ़ावा देना है।
हाँ। स्टार्टअप एवं स्टार्टअप इकोसिस्टम के हितधारकों की सहायता के लिए StartInUP पोर्टल से एकीकृत टोल-फ्री हेल्पलाइन सहित समर्पित शिकायत निवारण व्यवस्था उपलब्ध है।
हाँ। नीति के अंतर्गत दो वर्षों तक निःशुल्क इनक्यूबेशन सहायता, सरलीकृत अनुपालन व्यवस्था, श्रम कानूनों से संबंधित सुविधा, नेटवर्किंग के अवसर, मार्गदर्शन (मेंटरशिप), स्टार्टअप संवर्धन कार्यक्रम, निवेशक संपर्क के अवसर तथा इकोसिस्टम से संबंधित कार्यक्रमों में सहभागिता जैसी गैर-वित्तीय सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
हाँ। पात्र स्टार्टअप StartInUP द्वारा मान्यता प्राप्त इनक्यूबेटरों एवं सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंसों (CoEs) में अधिकतम दो वर्षों तक निःशुल्क इनक्यूबेशन सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
हाँ। स्टार्टअप नीति के अंतर्गत आयोजित अथवा समर्थित कार्यक्रमों, जैसे स्टार्टअप एक्सप्रेस, स्टार्टअप मेला, स्टार्टअप सप्ताह, हैकाथॉन, बूट कैंप, स्टार्टअप संगोष्ठी, व्यवसाय योजना प्रतियोगिता, ग्रैंड चैलेंज तथा एक्सचेंज कार्यक्रमों में सहभागिता कर सकते हैं।
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